अस्थमा (Asthma) एक दीर्घकालिक श्वसन रोग है, जिसमें सांस लेने में कठिनाई, सीने में जकड़न, खांसी और घरघराहट जैसी समस्याएँ होती हैं। आधुनिक उपचार अस्थमा के लक्षणों को नियंत्रित करते हैं, लेकिन आयुर्वेद शरीर के दोषों को संतुलित कर रोग की जड़ पर काम करता है। यही कारण है कि आज अस्थमा के रोगियों में आयुर्वेदिक उपचार और घरेलू उपायों की मांग लगातार बढ़ रही है।
अस्थमा का आयुर्वेदिक दृष्टिकोण
आयुर्वेद में अस्थमा को “तामक स्वास” कहा जाता है। यह मुख्य रूप से वात और कफ दोष की असंतुलित स्थिति से उत्पन्न होता है। जब कफ श्वसन नलिकाओं में जमा हो जाता है, तो वायु का प्रवाह बाधित होता है और सांस फूलने लगती है।
अस्थमा में आयुर्वेद कैसे मदद करता है?
आयुर्वेदिक चिकित्सा अस्थमा में तीन मुख्य तरीकों से कार्य करती है:
✔ दोषों का संतुलन
वात और कफ को प्राकृतिक औषधियों, योग, और आहार के माध्यम से नियंत्रित किया जाता है।
✔ प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत करना
हर्बल औषधियाँ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती हैं जिससे बार-बार होने वाले अटैक कम होते हैं।
✔ पाचन शक्ति में सुधार
कमज़ोर पाचन कफ निर्माण को बढ़ाता है। आयुर्वेद पाचन अग्नि (Agni) को मजबूत करता है।
अस्थमा के लिए असरदार आयुर्वेदिक घरेलू नुस्खे
🌿 1. अदरक और शहद
अदरक कफ को पिघलाकर सांस लेने में राहत देता है।
कैसे लें: अदरक का रस + शहद मिलाकर रोज सुबह सेवन करें।
🌿 2. तुलसी के पत्ते
तुलसी एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-एलर्जिक गुणों से भरपूर है।
कैसे लें: रोज 5-7 तुलसी के पत्ते चबाएँ या तुलसी की चाय पिएँ।
🌿 3. हल्दी वाला दूध
हल्दी प्राकृतिक एंटीबायोटिक है और सांस नलिकाओं की सूजन कम करती है।
कैसे लें: रात में हल्दी मिलाकर गर्म दूध पिएँ।
🌿 4. काली मुनक्का
प्रतिरक्षा बढ़ाकर सांस संबंधी समस्याओं में लाभ देता है।
कैसे लें: रात में 3–4 मुनक्के पानी में भिगोकर सुबह सेवन करें।
🌿 5. अजवाइन की भाप
अजवाइन कफ दूर करती है और श्वसन नलिकाओं को साफ करती है।
कैसे करें: अजवाइन को उबालें और उसकी भाप लें।
अस्थमा रोगियों के लिए आयुर्वेदिक जीवनशैली नियम
✔ 1. प्राणायाम करें
- अनुलोम-विलोम
- भस्त्रिका
- कपालभाति
ये फेफड़ों की क्षमता बढ़ाते हैं।
✔ 2. ठंडी और बासी चीज़ों से परहेज़
फ्रिज का पानी, आइसक्रीम व दही कफ बढ़ाते हैं।
✔ 3. धूल, धुआं और तेज़ सुगंध से बचें
ये अस्थमा ट्रिगर करते हैं।
✔ 4. सोने से पहले तेल मालिश
सरसों या तिल के तेल से हल्की मालिश वात दोष को शांत करती है।
✔ 5. ज्यादा देर खाली पेट न रहें
समय पर भोजन करने से पाचन अग्नि संतुलित रहती है।
कब करें डॉक्टर से संपर्क?
यदि ये लक्षण बार-बार दिखाई दें तो तुरंत आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह लें:
- सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई
- सीने में तेज जकड़न
- लगातार खांसी
- रात में सांस फूलना
निष्कर्ष
अस्थमा एक गंभीर लेकिन नियंत्रित होने वाली स्थिति है। आयुर्वेद इसका स्थायी समाधान प्रदान करने की क्षमता रखता है, क्योंकि यह केवल लक्षण नहीं, बल्कि रोग के मूल कारण को ठीक करता है। प्राकृतिक औषधियों, संतुलित आहार, योग और सही जीवनशैली की मदद से अस्थमा रोगी लंबे समय तक स्वस्थ और सक्रिय जीवन जी सकते हैं।








